प्रोडक्ट डिज़ाइनबी.डेस.एम.डेस.

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प्रोडक्ट डिज़ाइन मुख्य रूप से प्रोडक्ट्स, सिस्टम्स और उनके उपयोगकर्ताओं से सम्बद्ध है | एन.आई.डी. का प्रोडक्ट डिज़ाइन कार्यक्रम छात्रों को उपयोगकर्ताओं पर केन्द्रित दृष्टिकोण और प्रक्रियाएं सिखाता है | रचनात्मक प्रक्रिया के दौरान सामाजिक, भौतिक और पारिस्थितिक परिवेशों की ओर ज़िम्मेदारी और चिंता पर यहाँ विशेष ध्यान दिया जाता है | इस कार्यक्रम के कुछ मुख्य विषय हैं: ह्यूमन फैक्टर्स, कोग्नीटिव अर्गोनोमिक्स, फॉर्म स्टडीज, स्टूडियो स्किल्स, एडवांस्ड कैड, रिसर्च मेथड्स, डिज़ाइन मैनेजमेंट, मैटेरियल्स, मैन्युफैक्चरिंग प्रोसेसेज और सामाजिक विज्ञान | शिक्षा को कार्य प्रक्रिया पर विशेष रूप से केन्द्रित किया जाता है जिससे छात्र प्रतिभागी बने और सम्मिलित होना सीखे | डिज़ाइन प्रोजेक्ट्स यहाँ कि शिक्षा का एक मुख्य भाग हैं और उनकी जटिलता हर सेमेस्टर बढ़ती है, और वे एक प्रोडक्ट डिज़ाइनर के काम आने सभी विषयों का आवरण करते हैं | छात्रों को उद्योगी, सामाजिक, सरकारी और कॉर्पोरेट संस्थाओं के साथ सहभागिता के लिए प्रोत्साहित किया जाता है | डिज़ाइन प्रोजेक्ट्स को निम्न शैलियों में बांटा जा सकता है : उद्योग के लिये डिज़ाइन: राष्ट्रीय पैमाने पर लघु, मध्यम और दीर्घ उद्यमों के साथ सहभागिता के अवसर खोजे जाते हैं जिससे छात्रों को डिज़ाइन और उत्पाद के बुनियादी गुण सिखाये जा सकें और एक वैश्विक उपस्तिथि बनायी जा सके | प्रोजेक्ट्स का मुख्य केंद्र उपयोगकर्ताओं की ज़रूरत, उत्पाद और आर्थिक प्रभाव के लिए प्रोडक्ट्स और सर्विसेज पर रहता है | जीवन की गुणवत्ता के लिए डिज़ाइन: रोज़मर्रा में काम आने वाली वस्तुओं के निर्माण और अभिग्रहण में मौजूदा और उभरती टेक्नोलॉजी के लिए अनोखे सामाजिक और पारंपरिक समाधान खोजना | प्रोजेक्ट्स का मुख्य केंद्र घर, ऑफिस और सार्वजनिक स्थानों में जीवन की गुणवत्ता सुधारने के लिए प्रोडक्ट्स और सर्विसेज का निर्माण और विकास है | स्वास्थ्य के लिए डिज़ाइन: बुनियादी स्वास्थ्य सेवा से वंचित लोगों के लिए किफायती समाधान सुझाने के लिए छिड़ी मुहिम में प्रोडक्ट डिज़ाइनर्स के लिए कई अवसर हैं | प्रोजेक्ट्स मुख्यतः डिज़ाइन और रचनात्मक सोच की क्षमता का इस्तेमाल ज़रूरतमंदों के लिए स्वास्थ्य, उत्तरजीविता और विकास सम्बन्धी चुनौतियों से लड़ने के लिए करते हैं | सामाजिक प्रभाव के लिए डिज़ाइन : तेज़ी से बढ़ती भारतीय अर्थव्यवस्था के सामने खड़ी बुनियादी चुनौतियों से लड़ने के लिए डिज़ाइन सम्बद्ध समाधान खोजे जाते हैं | अर्बन मोबिलिटी, सस्टेनेंस, सोशल इक्विटी जैसी सार्वजनिक समस्याओं के लिए भी समाधानों का विकास किया जाता है | सस्टेनेबिलिटी के लिए डिज़ाइन: प्रोडक्ट्स, सिस्टम्स और परिवेशों के विकास के लिए डिज़ाइन का ज़िम्मेदार प्रयोग किया जाता है | डिज़ाइनर्स विकास के लिए नयी व्यवस्थाओं का निर्माण करते हैं जिनसे इंसानी जीवन और अनुभव बेहतर हो सके और साथ ही पर्यावरण और समुदाय को आरोग्य बनाया जा सके, और प्राकृतिक परिवेश में एकता लायी जा सके | डिज़ाइन से भविष्य: वैश्विक प्रवृत्तियों, चुनौतियों और अवसरों का शोध किया जाता है जिससे भविष्य को सुगम आकार दिया जा सके | प्रोजेक्ट्स मुख्यतः भारत के सम्मुख भविष्य में आने वाली कड़ी चुनौतियों पर केन्द्रित होते हैं जैसे आबादी, स्वास्थ्य, मोबिलिटी, स्वच्छता आदि | वर्त्तमान टेक्नोलॉजी का प्रयोग भविष्य की कल्पना करने के लिए किया जाता है | डिज़ाइन सिद्धांतों को भविष्य के लिए एक ढांचा तैयार करने के लिए और समाज का मार्गदर्शन करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है |

© 2016 NATIONAL INSTITUTE OF DESIGN