टेक्सटाइल डिज़ाइनबी.डेस.एम.डेस.

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टेक्सटाइल डिज़ाइन कार्यक्रम की निरंतर कोशिश रहती है कि डिज़ाइन के कार्यात्मक प्रयोग द्वारा टेक्सटाइल उद्योग, व्यापार और सामाजिक खण्डों का विकास हो सके | छात्रों को शोध और फील्ड-विजिट के माध्यम से सांस्कृतिक विरासत, सामाजिक, आर्थिक और पर्यावरण सम्बन्धी मुद्दों का महत्त्व भी समझाया जाता है | रचनात्मक अन्वेषण और कांसेप्ट से प्रोटोटाइप तक के सभी चरणों पर यहाँ का पाठ्यक्रम विशेष रूप से ध्यान देता है | इसके साथ ही सिद्धान्तिक और व्यवहारिक कुशलता का भी विकास किया जाता है| कार्यक्रम की शुरुआत टेक्सटाइल डिज़ाइन के बुनियादी अंशों से होती है, जिसके मुख्य भाग हैं: टेक्सटाइल फाइबर, वीव स्ट्रक्चर, सरफेस डिज़ाइन, डाइंग टेक्नीक्स, प्रिंटिंग मेथड्स, स्युइंग टेक्नीक्स, कंस्ट्रक्टेड टेक्सटाइल्स और साथ में गारमेंट डिज़ाइन के मूल अंश | जटिलता में बढ़ते डिज़ाइन प्रोजेक्ट और साथ में सिखाये जाने वाले सामाजिक ज्ञान, फैशन, ट्रेंड्स, ब्रांड आइडेंटिटी, प्रोद्योगिकी और कंप्यूटर एडेड डिज़ाइन की सहायता से छात्रों को टेक्सटाइल और अपैरल उद्योगों के लिए डिज़ाइन करना सिखाया जाता है | कार्यक्रम में कई सारे अन्तर्विभागीय प्रोजेक्ट्स भी होते हैं जिनमे छात्रों को सार्वजनिक स्थानों, प्रदर्शनियों, वाहनों और इंटीरियर्स के लिए टेक्सटाइल डिज़ाइन करना होता है | उद्योग और शिल्प के सभी चरणों की शिक्षा फील्ड विजिट्स और इंडस्ट्रियल ट्रेनिंग के माध्यम से दी जाती है | शिल्पों के दस्तावेजीकरण से छात्र शोधकार्य और फील्डवर्क का अनुभव पाते हैं और साथ ही डिज़ाइन पर प्रभाव डालने वाले सांस्कृतिक मुद्दों को भी समझते हैं | एन.आई.डी. के स्नातक टेक्सटाइल उत्पादक उद्योगों में कई तरह के रोज़गार पाते हैं | कई डिज़ाइनर खुद के उद्योग भी शुरू करते हैं और कुछ सामाजिक विकास की संस्थाओं से भी जुड़ते हैं |

© 2016 NATIONAL INSTITUTE OF DESIGN