निदेशक का संदेश

प्रिय मित्रो,
राष्ट्रीय ड़िजाइन संस्थान एक बहुत महत्वपूर्ण अवसर का गवाह है। संसद के एक अधिनियम के माध्यम से एनआईडी विधेयक पारित किया गया और राष्ट्रीय ड़िजाइन संस्थान अब राष्ट्रीय महत्व का संस्थान बन चुका है और यह एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। यह विधेयक सर्वसम्मति से 7 जुलाई 2014 को राज्य सभा और 9 जुलाई 2014 को लोक सभा द्वारा सर्वसम्मति से पारित किया गया। अब तक भारत में 40 ऐसे संस्थान हैं जिन्हें राष्ट्रीय महत्व के संस्थान के रूप में मान्यता प्राप्त है और उनमें से 36 इंजीनियरिंग संस्थान हैं। इस क्रम में एनआईडी 41वां संस्थान है और एकमात्र ड़िजाइन संस्थान जिसे इस सम्मान से नवाजा गया है। इस नये पहचान से एनआईडी को भारतीय ड़िजाइन प्रथाओं और विचारों को नये सुर्खियों में लाने में सहायता मिलेगी और उनके योग्यतानुसार मान्यता देने में मदद मिलेगी।
जून 2013 में डीआरपीएससीसी (विभाग संबंधी वाणिज्य की संसदीय स्थायी समिति) अहमदाबाद और गांधीनगर में एनआईडी परिसरों का दौरा किया। समिति के अध्यक्ष श्री शांता कुमार (सांसद) छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों के साथ बातचीत की और सुविधाओं का जायजा लिया साथ ही छात्रों के कार्यों को देखा। इसके अलावा इसके लिए सचिव जेआईपीपी और मैं आगे की चर्चा और राष्ट्रीकरण के लिए नई दिल्ली में सदस्यों के साथ एक बैठक के लिए आमंत्रित किया गया। डीआरपीएससीसी ने भी नई दिल्ली में सभी हितधारकों की एक अलग बैठक का आयोजन किया।
अब तक एनआईडी अपने छात्रों को केवल डिप्लोमा देता था, जिससे नौकरी की तलाश में कुछ कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था साथ ही विदेश में आगे की पढ़ाई के लिए आवेदन, शोध कार्य आदि के लिए दिक्कतों का सामना करना पड़ता था।
अब एनआईडी केंन्द्र सरकार से प्राप्त नवीनतम मान्यता के साथ अपने छात्रों को डिग्री और पीएचडी देने में समक्ष हो जाएगा। ड़िजाइन के विभिन्न क्षेत्रों के माध्यम से इस संस्थान के छात्र और पूर्व छात्र समाज को योगदान दे रहें हैं। राष्ट्रीय महत्व के संस्थान का दर्जा इस क्षेत्र में उनके योगदान को और सुदृढ़ करेगा और उन्हें समग्र राष्ट्रीय विकास में योगदान करने में मदद करेगा। दरअसल नई मान्यता निश्चित रूप से एनआईडी के छात्रों और संकायों दोनों के लिए अनुसंधान और अन्वेषण के लिए नए अवसर खोलेगा।
यह विधेयक बहुत ही उपयुक्त समय पर पारित हुआ है। इससे देश के सभी क्षेत्रों में एनआईडी की भूमिका और बाकी सभी क्षेत्रों में ड़िजाइन के महत्व पर जोर बढ़ेगा। इससे संस्थान शिक्षाविदों और उद्योग के बीच बातचीत के लिए उपयुक्त द्वारा बन जाएगा। शोधपत्र, किताब और मोनोग्राफ और दृश्य मीडिया के प्रकाशन के माध्यम से डिज़ाइन प्रसार में ये विधेयक एक सक्रिय भूमिका निभाएगा । 2014 में एनआईडी दुनिया के टॉप 30 ड़िजाइन कॉलेजों में चित्रित किया गया। भारत और विदेश के कई प्रमुख ड़िजाइन संस्थान के साथ शैक्षिक आदान-प्रदान एनआईडी के लिए वास्तव में एक सम्मान की बात है। सामाजिक जिम्मेदारी ड़िजाइन का एक अभिन्न अंग है। स्थिरता, समावेशी विकास और महिला सशक्तिकरण मंत्र के साथ एनआईडी पड़ोसी देशों के साथ अपनी ड़िजाइन विशेषज्ञता साझा करने के लिए कठिन प्रयास करता रहेगा । इसी क्रम में एनआईडी पहले से ही सार्क देशों में ड़िजाइन विकास करने की पहल के साथ आफ्रीका में भी लगा हुआ है। एनआईडी 1961 में स्थापित किया गया था, और हाल ही में स्वर्ण जयंती मनाई गयी है।
पचास से ज्यादा वर्षों के लिए, एनआईडी सामान्य रूप से भारत के भीतर और दुनियाभर में हो रही सामाजिक, सांस्कृतिक,  आर्थिक और प्रौद्योगिकीय परिवर्तन के लिए गवाह रहा हैं। राष्ट्रीय महत्व की संस्थान घोषित करने वाले इस विधेयक के पारित होने मात्र से ही संस्थान को अपनी शैक्षिक और प्रशिक्षण प्रथाओं और अनुसंधान पहल के माध्यम से डिज़ाइन के नए स्तर तक पहुँचने की अपनी प्रतिज्ञा को नवीकृत करने के लिए पर्याप्त है। एनआईडी सह-सृजन की नए सिरे से पहल साथ ही जीवन और सूचना देने की गुणवत्ता में सुधार करने के लिए अपने प्रयास में दृढ़ रहेगा।
एनआईडी आज एक अग्रणी स्थिति में पहुँच गया है। एनआईडी अपने स्थापना के समय से विभिन्न शासी परिषदों में कार्यलयों में अपने योगदान देने वाले सदस्यों द्वारा किए गए असंख्य योगदान को अत्यंत विनम्रता से स्वीकार करता है। संस्थान के वरिष्ठ संकाय और स्टाफ सदस्यों, छात्रों के उत्साही बैचों के अथक प्रयास के कारण ही आज का संस्थान सम्भव है। दरअसल चार प्रमुख हितधारकों के दिली भागीदारी के कारण ही संस्थान आज राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय दोनों स्तर पर उच्च सम्मान की स्थिति में खड़ा है।
प्रदुम्न व्यास
निदेशक, एनआईडी

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